🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 217

The Book of Childhood · Entry 217 of 760 · type: चौपाई

जसि बिबाह कै बिधि श्रुति गाई। महामुनिन्ह सो सब करवाई।। गहि गिरीस कुस कन्या पानी। भवहि समरपीं जानि भवानी।। पानिग्रहन जब कीन्ह महेसा। हिंयँ हरषे तब सकल सुरेसा।। बेद मंत्र मुनिबर उच्चरहीं। जय जय जय संकर सुर करहीं।। बाजहिं बाजन बिबिध बिधाना। सुमनबृष्टि नभ भै बिधि नाना।। हर गिरिजा कर भयउ बिबाहू। सकल भुवन भरि रहा उछाहू।। दासीं दास तुरग रथ नागा। धेनु बसन मनि बस्तु बिभागा।। अन्न कनकभाजन भरि जाना। दाइज दीन्ह न जाइ बखाना।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 217 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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