🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 214

The Book of Childhood · Entry 214 of 760 · type: चौपाई

बोलि सकल सुर सादर लीन्हे। सबहि जथोचित आसन दीन्हे।। बेदी बेद बिधान सँवारी। सुभग सुमंगल गावहिं नारी।। सिंघासनु अति दिब्य सुहावा। जाइ न बरनि बिरंचि बनावा।। बैठे सिव बिप्रन्ह सिरु नाई। हृदयँ सुमिरि निज प्रभु रघुराई।। बहुरि मुनीसन्ह उमा बोलाई। करि सिंगारु सखीं लै आई।। देखत रूपु सकल सुर मोहे। बरनै छबि अस जग कबि को है।। जगदंबिका जानि भव भामा। सुरन्ह मनहिं मन कीन्ह प्रनामा।। सुंदरता मरजाद भवानी। जाइ न कोटिहुँ बदन बखानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 214 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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