🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 211

The Book of Childhood · Entry 211 of 760 · type: चौपाई

तब मयना हिमवंतु अनंदे। पुनि पुनि पारबती पद बंदे।। नारि पुरुष सिसु जुबा सयाने। नगर लोग सब अति हरषाने।। लगे होन पुर मंगलगाना। सजे सबहि हाटक घट नाना।। भाँति अनेक भई जेवराना। सूपसास्त्र जस कछु ब्यवहारा।। सो जेवनार कि जाइ बखानी। बसहिं भवन जेहिं मातु भवानी।। सादर बोले सकल बराती। बिष्नु बिरंचि देव सब जाती।। बिबिधि पाँति बैठी जेवनारा। लागे परुसन निपुन सुआरा।। नारिबृंद सुर जेवँत जानी। लगीं देन गारीं मृदु बानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 211 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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