🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 208

The Book of Childhood · Entry 208 of 760 · type: चौपाई

तब नारद सबहि समुझावा। पूरुब कथाप्रसंगु सुनावा।। मयना सत्य सुनहु मम बानी। जगदंबा तव सुता भवानी।। अजा अनादि सक्ति अबिनासिनि। सदा संभु अरधंग निवासिनि।। जग संभव पालन लय कारिनि। निज इच्छा लीला बपु धारिनि।। जनमीं प्रथम दच्छ गृह जाई। नामु सती सुंदर तनु पाई।। तहँहुँ सती संकरहि बिबाहीं। कथा प्रसिद्ध सकल जग माहीं।। एक बार आवत सिव संगा। देखेउ रघुकुल कमल पतंगा।। भयउ मोहु सिव कहा न कीन्हा। भ्रम बस बेषु सीय कर लीन्हा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 208 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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