🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 202

The Book of Childhood · Entry 202 of 760 · type: चौपाई

लै अगवान बरातहि आए। दिए सबहि जनवास सुहाए।। मैनाँ सुभ आरती सँवारी। संग सुमंगल गावहिं नारी।। कंचन थार सोह बर पानी। परिछन चली हरहि हरषानी।। बिकट बेष रुद्रहि जब देखा। अबलन्ह उर भय भयउ बिसेषा।। भागि भवन पैठीं अति त्रासा। गए महेसु जहाँ जनवासा।। मैना हृदयँ भयउ दुखु भारी। लीन्ही बोलि गिरीसकुमारी।। अधिक सनेहँ गोद बैठारी। स्याम सरोज नयन भरे बारी।। जेहिं बिधि तुम्हहि रूपु अस दीन्हा। तेहिं जड़ बरु बाउर कस कीन्हा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 202 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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