🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 191

The Book of Childhood · Entry 191 of 760 · type: चौपाई

सिवहि संभु गन करहिं सिंगारा। जटा मुकुट अहि मौरु सँवारा।। कुंडल कंकन पहिरे ब्याला। तन बिभूति पट केहरि छाला।। ससि ललाट सुंदर सिर गंगा। नयन तीनि उपबीत भुजंगा।। गरल कंठ उर नर सिर माला। असिव बेष सिवधाम कृपाला।। कर त्रिसूल अरु डमरु बिराजा। चले बसहँ चढ़ि बाजहिं बाजा।। देखि सिवहि सुरत्रिय मुसुकाहीं। बर लायक दुलहिनि जग नाहीं।। बिष्नु बिरंचि आदि सुरब्राता। चढ़ि चढ़ि बाहन चले बराता।। सुर समाज सब भाँति अनूपा। नहिं बरात दूलह अनुरूपा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 191 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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