🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 189

The Book of Childhood · Entry 189 of 760 · type: चौपाई

सबु प्रसंगु गिरिपतिहि सुनावा। मदन दहन सुनि अति दुखु पावा।। बहुरि कहेउ रति कर बरदाना। सुनि हिमवंत बहुत सुखु माना।। हृदयँ बिचारि संभु प्रभुताई। सादर मुनिबर लिए बोलाई।। सुदिनु सुनखतु सुघरी सोचाई। बेगि बेदबिधि लगन धराई।। पत्री सप्तरिषिन्ह सोइ दीन्ही। गहि पद बिनय हिमाचल कीन्ही।। जाइ बिधिहि दीन्हि सो पाती। बाचत प्रीति न हृदयँ समाती।। लगन बाचि अज सबहि सुनाई। हरषे मुनि सब सुर समुदाई।। सुमन बृष्टि नभ बाजन बाजे। मंगल कलस दसहुँ दिसि साजे।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 189 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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