🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 187

The Book of Childhood · Entry 187 of 760 · type: चौपाई

सुनि बोलीं मुसकाइ भवानी। उचित कहेहु मुनिबर बिग्यानी।। तुम्हरें जान कामु अब जारा। अब लगि संभु रहे सबिकारा।। हमरें जान सदा सिव जोगी। अज अनवद्य अकाम अभोगी।। जौं मैं सिव सेये अस जानी। प्रीति समेत कर्म मन बानी।। तौ हमार पन सुनहु मुनीसा। करिहहिं सत्य कृपानिधि ईसा।। तुम्ह जो कहा हर जारेउ मारा। सोइ अति बड़ अबिबेकु तुम्हारा।। तात अनल कर सहज सुभाऊ। हिम तेहि निकट जाइ नहिं काऊ।। गएँ समीप सो अवसि नसाई। असि मन्मथ महेस की नाई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 187 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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