🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 185

The Book of Childhood · Entry 185 of 760 · type: चौपाई

यह उत्सव देखिअ भरि लोचन। सोइ कछु करहु मदन मद मोचन। कामु जारि रति कहुँ बरु दीन्हा। कृपासिंधु यह अति भल कीन्हा।। सासति करि पुनि करहिं पसाऊ। नाथ प्रभुन्ह कर सहज सुभाऊ।। पारबतीं तपु कीन्ह अपारा। करहु तासु अब अंगीकारा।। सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी। ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी।। तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं। बरषि सुमन जय जय सुर साई।। अवसरु जानि सप्तरिषि आए। तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए।। प्रथम गए जहँ रही भवानी। बोले मधुर बचन छल सानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 185 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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