🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 180

The Book of Childhood · Entry 180 of 760 · type: चौपाई

देखि रसाल बिटप बर साखा। तेहि पर चढ़ेउ मदनु मन माखा।। सुमन चाप निज सर संधाने। अति रिस ताकि श्रवन लगि ताने।। छाड़े बिषम बिसिख उर लागे। छुटि समाधि संभु तब जागे।। भयउ ईस मन छोभु बिसेषी। नयन उघारि सकल दिसि देखी।। सौरभ पल्लव मदनु बिलोका। भयउ कोपु कंपेउ त्रैलोका।। तब सिवँ तीसर नयन उघारा। चितवत कामु भयउ जरि छारा।। हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी।। समुझि कामसुखु सोचहिं भोगी। भए अकंटक साधक जोगी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 180 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷