🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 177

The Book of Childhood · Entry 177 of 760 · type: चौपाई

उभय घरी अस कौतुक भयऊ। जौ लगि कामु संभु पहिं गयऊ।। सिवहि बिलोकि ससंकेउ मारू। भयउ जथाथिति सबु संसारू।। भए तुरत सब जीव सुखारे। जिमि मद उतरि गएँ मतवारे।। रुद्रहि देखि मदन भय माना। दुराधरष दुर्गम भगवाना।। फिरत लाज कछु करि नहिं जाई। मरनु ठानि मन रचेसि उपाई।। प्रगटेसि तुरत रुचिर रितुराजा। कुसुमित नव तरु राजि बिराजा।। बन उपबन बापिका तड़ागा। परम सुभग सब दिसा बिभागा।। जहँ तहँ जनु उमगत अनुरागा। देखि मुएहुँ मन मनसिज जागा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 177 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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