🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 171

The Book of Childhood · Entry 171 of 760 · type: चौपाई

तदपि करब मैं काजु तुम्हारा। श्रुति कह परम धरम उपकारा।। पर हित लागि तजइ जो देही। संतत संत प्रसंसहिं तेही।। अस कहि चलेउ सबहि सिरु नाई। सुमन धनुष कर सहित सहाई।। चलत मार अस हृदयँ बिचारा। सिव बिरोध ध्रुव मरनु हमारा।। तब आपन प्रभाउ बिस्तारा। निज बस कीन्ह सकल संसारा।। कोपेउ जबहि बारिचरकेतू। छन महुँ मिटे सकल श्रुति सेतू।। ब्रह्मचर्ज ब्रत संजम नाना। धीरज धरम ग्यान बिग्याना।। सदाचार जप जोग बिरागा। सभय बिबेक कटकु सब भागा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 171 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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