🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 169

The Book of Childhood · Entry 169 of 760 · type: चौपाई

मोर कहा सुनि करहु उपाई। होइहि ईस्वर करिहि सहाई।। सतीं जो तजी दच्छ मख देहा। जनमी जाइ हिमाचल गेहा।। तेहिं तपु कीन्ह संभु पति लागी। सिव समाधि बैठे सबु त्यागी।। जदपि अहइ असमंजस भारी। तदपि बात एक सुनहु हमारी।। पठवहु कामु जाइ सिव पाहीं। करै छोभु संकर मन माहीं।। तब हम जाइ सिवहि सिर नाई। करवाउब बिबाहु बरिआई।। एहि बिधि भलेहि देवहित होई। मर अति नीक कहइ सबु कोई।। अस्तुति सुरन्ह कीन्हि अति हेतू। प्रगटेउ बिषमबान झषकेतू।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 169 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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