🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 165

The Book of Childhood · Entry 165 of 760 · type: चौपाई

जौं तुम्ह मिलतेहु प्रथम मुनीसा। सुनतिउँ सिख तुम्हारि धरि सीसा।। अब मैं जन्मु संभु हित हारा। को गुन दूषन करै बिचारा।। जौं तुम्हरे हठ हृदयँ बिसेषी। रहि न जाइ बिनु किएँ बरेषी।। तौ कौतुकिअन्ह आलसु नाहीं। बर कन्या अनेक जग माहीं।। जन्म कोटि लगि रगर हमारी। बरउँ संभु न त रहउँ कुआरी।। तजउँ न नारद कर उपदेसू। आपु कहहि सत बार महेसू।। मैं पा परउँ कहइ जगदंबा। तुम्ह गृह गवनहु भयउ बिलंबा।। देखि प्रेमु बोले मुनि ग्यानी। जय जय जगदंबिके भवानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 165 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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