🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 163

The Book of Childhood · Entry 163 of 760 · type: चौपाई

अजहूँ मानहु कहा हमारा। हम तुम्ह कहुँ बरु नीक बिचारा।। अति सुंदर सुचि सुखद सुसीला। गावहिं बेद जासु जस लीला।। दूषन रहित सकल गुन रासी। श्रीपति पुर बैकुंठ निवासी।। अस बरु तुम्हहि मिलाउब आनी। सुनत बिहसि कह बचन भवानी।। सत्य कहेहु गिरिभव तनु एहा। हठ न छूट छूटै बरु देहा।। कनकउ पुनि पषान तें होई। जारेहुँ सहजु न परिहर सोई।। नारद बचन न मैं परिहरऊँ। बसउ भवनु उजरउ नहिं डरऊँ।। गुर कें बचन प्रतीति न जेही। सपनेहुँ सुगम न सुख सिधि तेही।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 163 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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