🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 153

The Book of Childhood · Entry 153 of 760 · type: चौपाई

अस तपु काहुँ न कीन्ह भवानी। भउ अनेक धीर मुनि ग्यानी।। अब उर धरहु ब्रह्म बर बानी। सत्य सदा संतत सुचि जानी।। आवै पिता बोलावन जबहीं। हठ परिहरि घर जाएहु तबहीं।। मिलहिं तुम्हहि जब सप्त रिषीसा। जानेहु तब प्रमान बागीसा।। सुनत गिरा बिधि गगन बखानी। पुलक गात गिरिजा हरषानी।। उमा चरित सुंदर मैं गावा। सुनहु संभु कर चरित सुहावा।। जब तें सती जाइ तनु त्यागा। तब सें सिव मन भयउ बिरागा।। जपहिं सदा रघुनायक नामा। जहँ तहँ सुनहिं राम गुन ग्रामा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 153 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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