🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 147

The Book of Childhood · Entry 147 of 760 · type: चौपाई

अब जौ तुम्हहि सुता पर नेहू। तौ अस जाइ सिखावन देहू।। करै सो तपु जेहिं मिलहिं महेसू। आन उपायँ न मिटहि कलेसू।। नारद बचन सगर्भ सहेतू। सुंदर सब गुन निधि बृषकेतू।। अस बिचारि तुम्ह तजहु असंका। सबहि भाँति संकरु अकलंका।। सुनि पति बचन हरषि मन माहीं। गई तुरत उठि गिरिजा पाहीं।। उमहि बिलोकि नयन भरे बारी। सहित सनेह गोद बैठारी।। बारहिं बार लेति उर लाई। गदगद कंठ न कछु कहि जाई।। जगत मातु सर्बग्य भवानी। मातु सुखद बोलीं मृदु बानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 147 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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