🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 145

The Book of Childhood · Entry 145 of 760 · type: चौपाई

कहि अस ब्रह्मभवन मुनि गयऊ। आगिल चरित सुनहु जस भयऊ।। पतिहि एकांत पाइ कह मैना। नाथ न मैं समुझे मुनि बैना।। जौं घरु बरु कुलु होइ अनूपा। करिअ बिबाहु सुता अनुरुपा।। न त कन्या बरु रहउ कुआरी। कंत उमा मम प्रानपिआरी।। जौं न मिलहि बरु गिरिजहि जोगू। गिरि जड़ सहज कहिहि सबु लोगू।। सोइ बिचारि पति करेहु बिबाहू। जेहिं न बहोरि होइ उर दाहू।। अस कहि परि चरन धरि सीसा। बोले सहित सनेह गिरीसा।। बरु पावक प्रगटै ससि माहीं। नारद बचनु अन्यथा नाहीं।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 145 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷