🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 143

The Book of Childhood · Entry 143 of 760 · type: चौपाई

सुरसरि जल कृत बारुनि जाना। कबहुँ न संत करहिं तेहि पाना।। सुरसरि मिलें सो पावन जैसें। ईस अनीसहि अंतरु तैसें।। संभु सहज समरथ भगवाना। एहि बिबाहँ सब बिधि कल्याना।। दुराराध्य पै अहहिं महेसू। आसुतोष पुनि किएँ कलेसू।। जौं तपु करै कुमारि तुम्हारी। भाविउ मेटि सकहिं त्रिपुरारी।। जद्यपि बर अनेक जग माहीं। एहि कहँ सिव तजि दूसर नाहीं।। बर दायक प्रनतारति भंजन। कृपासिंधु सेवक मन रंजन।। इच्छित फल बिनु सिव अवराधे। लहिअ न कोटि जोग जप साधें।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 143 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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