🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 141

The Book of Childhood · Entry 141 of 760 · type: चौपाई

तदपि एक मैं कहउँ उपाई। होइ करै जौं दैउ सहाई।। जस बरु मैं बरनेउँ तुम्ह पाहीं। मिलहि उमहि तस संसय नाहीं।। जे जे बर के दोष बखाने। ते सब सिव पहि मैं अनुमाने।। जौं बिबाहु संकर सन होई। दोषउ गुन सम कह सबु कोई।। जौं अहि सेज सयन हरि करहीं। बुध कछु तिन्ह कर दोषु न धरहीं।। भानु कृसानु सर्ब रस खाहीं। तिन्ह कहँ मंद कहत कोउ नाहीं।। सुभ अरु असुभ सलिल सब बहई। सुरसरि कोउ अपुनीत न कहई।। समरथ कहुँ नहिं दोषु गोसाई। रबि पावक सुरसरि की नाई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 141 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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