🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 139

The Book of Childhood · Entry 139 of 760 · type: चौपाई

सुनि मुनि गिरा सत्य जियँ जानी। दुख दंपतिहि उमा हरषानी।। नारदहुँ यह भेदु न जाना। दसा एक समुझब बिलगाना।। सकल सखीं गिरिजा गिरि मैना। पुलक सरीर भरे जल नैना।। होइ न मृषा देवरिषि भाषा। उमा सो बचनु हृदयँ धरि राखा।। उपजेउ सिव पद कमल सनेहू। मिलन कठिन मन भा संदेहू।। जानि कुअवसरु प्रीति दुराई। सखी उछँग बैठी पुनि जाई।। झूठि न होइ देवरिषि बानी। सोचहि दंपति सखीं सयानी।। उर धरि धीर कहइ गिरिराऊ। कहहु नाथ का करिअ उपाऊ।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 139 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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