🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 137

The Book of Childhood · Entry 137 of 760 · type: चौपाई

कह मुनि बिहसि गूढ़ मृदु बानी। सुता तुम्हारि सकल गुन खानी।। सुंदर सहज सुसील सयानी। नाम उमा अंबिका भवानी।। सब लच्छन संपन्न कुमारी। होइहि संतत पियहि पिआरी।। सदा अचल एहि कर अहिवाता। एहि तें जसु पैहहिं पितु माता।। होइहि पूज्य सकल जग माहीं। एहि सेवत कछु दुर्लभ नाहीं।। एहि कर नामु सुमिरि संसारा। त्रिय चढ़हहिं पतिब्रत असिधारा।। सैल सुलच्छन सुता तुम्हारी। सुनहु जे अब अवगुन दुइ चारी।। अगुन अमान मातु पितु हीना। उदासीन सब संसय छीना।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 137 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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