🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 133

The Book of Childhood · Entry 133 of 760 · type: चौपाई

समाचार सब संकर पाए। बीरभद्रु करि कोप पठाए।। जग्य बिधंस जाइ तिन्ह कीन्हा। सकल सुरन्ह बिधिवत फलु दीन्हा।। भे जगबिदित दच्छ गति सोई। जसि कछु संभु बिमुख कै होई।। यह इतिहास सकल जग जानी। ताते मैं संछेप बखानी।। सतीं मरत हरि सन बरु मागा। जनम जनम सिव पद अनुरागा।। तेहि कारन हिमगिरि गृह जाई। जनमीं पारबती तनु पाई।। जब तें उमा सैल गृह जाईं। सकल सिद्धि संपति तहँ छाई।। जहँ तहँ मुनिन्ह सुआश्रम कीन्हे। उचित बास हिम भूधर दीन्हे।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 133 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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