🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 129

The Book of Childhood · Entry 129 of 760 · type: चौपाई

पिता भवन जब गई भवानी। दच्छ त्रास काहुँ न सनमानी।। सादर भलेहिं मिली एक माता। भगिनीं मिलीं बहुत मुसुकाता।। दच्छ न कछु पूछी कुसलाता। सतिहि बिलोकि जरे सब गाता।। सतीं जाइ देखेउ तब जागा। कतहुँ न दीख संभु कर भागा।। तब चित चढ़ेउ जो संकर कहेऊ। प्रभु अपमानु समुझि उर दहेऊ।। पाछिल दुखु न हृदयँ अस ब्यापा। जस यह भयउ महा परितापा।। जद्यपि जग दारुन दुख नाना। सब तें कठिन जाति अवमाना।। समुझि सो सतिहि भयउ अति क्रोधा। बहु बिधि जननीं कीन्ह प्रबोधा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 129 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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