🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 125

The Book of Childhood · Entry 125 of 760 · type: चौपाई

किंनर नाग सिद्ध गंधर्बा। बधुन्ह समेत चले सुर सर्बा।। बिष्नु बिरंचि महेसु बिहाई। चले सकल सुर जान बनाई।। सतीं बिलोके ब्योम बिमाना। जात चले सुंदर बिधि नाना।। सुर सुंदरी करहिं कल गाना। सुनत श्रवन छूटहिं मुनि ध्याना।। पूछेउ तब सिवँ कहेउ बखानी। पिता जग्य सुनि कछु हरषानी।। जौं महेसु मोहि आयसु देहीं। कुछ दिन जाइ रहौं मिस एहीं।। पति परित्याग हृदय दुखु भारी। कहइ न निज अपराध बिचारी।। बोली सती मनोहर बानी। भय संकोच प्रेम रस सानी।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 125 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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