🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 119

The Book of Childhood · Entry 119 of 760 · type: चौपाई

हृदयँ सोचु समुझत निज करनी। चिंता अमित जाइ नहि बरनी।। कृपासिंधु सिव परम अगाधा। प्रगट न कहेउ मोर अपराधा।। संकर रुख अवलोकि भवानी। प्रभु मोहि तजेउ हृदयँ अकुलानी।। निज अघ समुझि न कछु कहि जाई। तपइ अवाँ इव उर अधिकाई।। सतिहि ससोच जानि बृषकेतू। कहीं कथा सुंदर सुख हेतू।। बरनत पंथ बिबिध इतिहासा। बिस्वनाथ पहुँचे कैलासा।। तहँ पुनि संभु समुझि पन आपन। बैठे बट तर करि कमलासन।। संकर सहज सरुप सम्हारा। लागि समाधि अखंड अपारा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 119 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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