🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 117

The Book of Childhood · Entry 117 of 760 · type: चौपाई

तब संकर प्रभु पद सिरु नावा। सुमिरत रामु हृदयँ अस आवा।। एहिं तन सतिहि भेट मोहि नाहीं। सिव संकल्पु कीन्ह मन माहीं।। अस बिचारि संकरु मतिधीरा। चले भवन सुमिरत रघुबीरा।। चलत गगन भै गिरा सुहाई। जय महेस भलि भगति दृढ़ाई।। अस पन तुम्ह बिनु करइ को आना। रामभगत समरथ भगवाना।। सुनि नभगिरा सती उर सोचा। पूछा सिवहि समेत सकोचा।। कीन्ह कवन पन कहहु कृपाला। सत्यधाम प्रभु दीनदयाला।। जदपि सतीं पूछा बहु भाँती। तदपि न कहेउ त्रिपुर आराती।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 117 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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