🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 11

The Book of Childhood · Entry 11 of 760 · type: चौपाई

मैं अपनी दिसि कीन्ह निहोरा। तिन्ह निज ओर न लाउब भोरा।। बायस पलिअहिं अति अनुरागा। होहिं निरामिष कबहुँ कि कागा।। बंदउँ संत असज्जन चरना। दुखप्रद उभय बीच कछु बरना।। बिछुरत एक प्रान हरि लेहीं। मिलत एक दुख दारुन देहीं।। उपजहिं एक संग जग माहीं। जलज जोंक जिमि गुन बिलगाहीं।। सुधा सुरा सम साधू असाधू। जनक एक जग जलधि अगाधू।। भल अनभल निज निज करतूती। लहत सुजस अपलोक बिभूती।। सुधा सुधाकर सुरसरि साधू। गरल अनल कलिमल सरि ब्याधू।। गुन अवगुन जानत सब कोई। जो जेहि भाव नीक तेहि सोई।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 11 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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