🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 107

The Book of Childhood · Entry 107 of 760 · type: चौपाई

जौं तुम्हरें मन अति संदेहू। तौ किन जाइ परीछा लेहू।। तब लगि बैठ अहउँ बटछाहिं। जब लगि तुम्ह ऐहहु मोहि पाही।। जैसें जाइ मोह भ्रम भारी। करेहु सो जतनु बिबेक बिचारी।। चलीं सती सिव आयसु पाई। करहिं बिचारु करौं का भाई।। इहाँ संभु अस मन अनुमाना। दच्छसुता कहुँ नहिं कल्याना।। मोरेहु कहें न संसय जाहीं। बिधी बिपरीत भलाई नाहीं।। होइहि सोइ जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावै साखा।। अस कहि लगे जपन हरिनामा। गई सती जहँ प्रभु सुखधामा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 107 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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