🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 104

The Book of Childhood · Entry 104 of 760 · type: चौपाई

बिष्नु जो सुर हित नरतनु धारी। सोउ सर्बग्य जथा त्रिपुरारी।। खोजइ सो कि अग्य इव नारी। ग्यानधाम श्रीपति असुरारी।। संभुगिरा पुनि मृषा न होई। सिव सर्बग्य जान सबु कोई।। अस संसय मन भयउ अपारा। होई न हृदयँ प्रबोध प्रचारा।। जद्यपि प्रगट न कहेउ भवानी। हर अंतरजामी सब जानी।। सुनहि सती तव नारि सुभाऊ। संसय अस न धरिअ उर काऊ।। जासु कथा कुभंज रिषि गाई। भगति जासु मैं मुनिहि सुनाई।। सोउ मम इष्टदेव रघुबीरा। सेवत जाहि सदा मुनि धीरा।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 104 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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