🪷 Rāmcharitamānas · Bāla-Kāṇḍa · Entry 100

The Book of Childhood · Entry 100 of 760 · type: चौपाई

रावन मरन मनुज कर जाचा। प्रभु बिधि बचनु कीन्ह चह साचा।। जौं नहिं जाउँ रहइ पछितावा। करत बिचारु न बनत बनावा।। एहि बिधि भए सोचबस ईसा। तेहि समय जाइ दससीसा।। लीन्ह नीच मारीचहि संगा। भयउ तुरत सोइ कपट कुरंगा।। करि छलु मूढ़ हरी बैदेही। प्रभु प्रभाउ तस बिदित न तेही।। मृग बधि बन्धु सहित हरि आए। आश्रमु देखि नयन जल छाए।। बिरह बिकल नर इव रघुराई। खोजत बिपिन फिरत दोउ भाई।। कबहूँ जोग बियोग न जाकें। देखा प्रगट बिरह दुख ताकें।।
— Rāmcharitamānas Bāla-Kāṇḍa entry 100 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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