🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 94

The Book of Ayodhyā · Entry 94 of 664 · type: चौपाई

धन्य जनमु जगतीतल तासू। पितहि प्रमोदु चरित सुनि जासू।। चारि पदारथ करतल ताकें। प्रिय पितु मातु प्रान सम जाकें।। आयसु पालि जनम फलु पाई। ऐहउँ बेगिहिं होउ रजाई।। बिदा मातु सन आवउँ मागी। चलिहउँ बनहि बहुरि पग लागी।। अस कहि राम गवनु तब कीन्हा। भूप सोक बसु उतरु न दीन्हा।। नगर ब्यापि गइ बात सुतीछी। छुअत चढ़ी जनु सब तन बीछी।। सुनि भए बिकल सकल नर नारी। बेलि बिटप जिमि देखि दवारी।। जो जहँ सुनइ धुनइ सिरु सोई। बड़ बिषादु नहिं धीरजु होई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 94 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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