🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 90

The Book of Ayodhyā · Entry 90 of 664 · type: चौपाई

अवनिप अकनि रामु पगु धारे। धरि धीरजु तब नयन उघारे।। सचिवँ सँभारि राउ बैठारे। चरन परत नृप रामु निहारे।। लिए सनेह बिकल उर लाई। गै मनि मनहुँ फनिक फिरि पाई।। रामहि चितइ रहेउ नरनाहू। चला बिलोचन बारि प्रबाहू।। सोक बिबस कछु कहै न पारा। हृदयँ लगावत बारहिं बारा।। बिधिहि मनाव राउ मन माहीं। जेहिं रघुनाथ न कानन जाहीं।। सुमिरि महेसहि कहइ निहोरी। बिनती सुनहु सदासिव मोरी।। आसुतोष तुम्ह अवढर दानी। आरति हरहु दीन जनु जानी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 90 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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