🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 88

The Book of Ayodhyā · Entry 88 of 664 · type: चौपाई

रहसी रानि राम रुख पाई। बोली कपट सनेहु जनाई।। सपथ तुम्हार भरत कै आना। हेतु न दूसर मै कछु जाना।। तुम्ह अपराध जोगु नहिं ताता। जननी जनक बंधु सुखदाता।। राम सत्य सबु जो कछु कहहू। तुम्ह पितु मातु बचन रत अहहू।। पितहि बुझाइ कहहु बलि सोई। चौथेंपन जेहिं अजसु न होई।। तुम्ह सम सुअन सुकृत जेहिं दीन्हे। उचित न तासु निरादरु कीन्हे।। लागहिं कुमुख बचन सुभ कैसे। मगहँ गयादिक तीरथ जैसे।। रामहि मातु बचन सब भाए। जिमि सुरसरि गत सलिल सुहाए।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 88 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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