🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 76

The Book of Ayodhyā · Entry 76 of 664 · type: चौपाई

राम राम रट बिकल भुआलू। जनु बिनु पंख बिहंग बेहालू।। हृदयँ मनाव भोरु जनि होई। रामहि जाइ कहै जनि कोई।। उदउ करहु जनि रबि रघुकुल गुर। अवध बिलोकि सूल होइहि उर।। भूप प्रीति कैकइ कठिनाई। उभय अवधि बिधि रची बनाई।। बिलपत नृपहि भयउ भिनुसारा। बीना बेनु संख धुनि द्वारा।। पढ़हिं भाट गुन गावहिं गायक। सुनत नृपहि जनु लागहिं सायक।। मंगल सकल सोहाहिं न कैसें। सहगामिनिहि बिभूषन जैसें।। तेहिं निसि नीद परी नहि काहू। राम दरस लालसा उछाहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 76 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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