🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 66

The Book of Ayodhyā · Entry 66 of 664 · type: चौपाई

राम सपथ सत कहुउँ सुभाऊ। राममातु कछु कहेउ न काऊ।। मैं सबु कीन्ह तोहि बिनु पूँछें। तेहि तें परेउ मनोरथु छूछें।। रिस परिहरू अब मंगल साजू। कछु दिन गएँ भरत जुबराजू।। एकहि बात मोहि दुखु लागा। बर दूसर असमंजस मागा।। अजहुँ हृदय जरत तेहि आँचा। रिस परिहास कि साँचेहुँ साँचा।। कहु तजि रोषु राम अपराधू। सबु कोउ कहइ रामु सुठि साधू।। तुहूँ सराहसि करसि सनेहू। अब सुनि मोहि भयउ संदेहू।। जासु सुभाउ अरिहि अनुकूला। सो किमि करिहि मातु प्रतिकूला।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 66 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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