🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 64

The Book of Ayodhyā · Entry 64 of 664 · type: चौपाई

आगें दीखि जरत रिस भारी। मनहुँ रोष तरवारि उघारी।। मूठि कुबुद्धि धार निठुराई। धरी कूबरीं सान बनाई।। लखी महीप कराल कठोरा। सत्य कि जीवनु लेइहि मोरा।। बोले राउ कठिन करि छाती। बानी सबिनय तासु सोहाती।। प्रिया बचन कस कहसि कुभाँती। भीर प्रतीति प्रीति करि हाँती।। मोरें भरतु रामु दुइ आँखी। सत्य कहउँ करि संकरू साखी।। अवसि दूतु मैं पठइब प्राता। ऐहहिं बेगि सुनत दोउ भ्राता।। सुदिन सोधि सबु साजु सजाई। देउँ भरत कहुँ राजु बजाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 64 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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