🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 62

The Book of Ayodhyā · Entry 62 of 664 · type: चौपाई

एहि बिधि राउ मनहिं मन झाँखा। देखि कुभाँति कुमति मन माखा।। भरतु कि राउर पूत न होहीं। आनेहु मोल बेसाहि कि मोही।। जो सुनि सरु अस लाग तुम्हारें। काहे न बोलहु बचनु सँभारे।। देहु उतरु अनु करहु कि नाहीं। सत्यसंध तुम्ह रघुकुल माहीं।। देन कहेहु अब जनि बरु देहू। तजहुँ सत्य जग अपजसु लेहू।। सत्य सराहि कहेहु बरु देना। जानेहु लेइहि मागि चबेना।। सिबि दधीचि बलि जो कछु भाषा। तनु धनु तजेउ बचन पनु राखा।। अति कटु बचन कहति कैकेई। मानहुँ लोन जरे पर देई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 62 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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