🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 58

The Book of Ayodhyā · Entry 58 of 664 · type: चौपाई

जानेउँ मरमु राउ हँसि कहई। तुम्हहि कोहाब परम प्रिय अहई।। थाति राखि न मागिहु काऊ। बिसरि गयउ मोहि भोर सुभाऊ।। झूठेहुँ हमहि दोषु जनि देहू। दुइ कै चारि मागि मकु लेहू।। रघुकुल रीति सदा चलि आई। प्रान जाहुँ बरु बचनु न जाई।। नहिं असत्य सम पातक पुंजा। गिरि सम होहिं कि कोटिक गुंजा।। सत्यमूल सब सुकृत सुहाए। बेद पुरान बिदित मनु गाए।। तेहि पर राम सपथ करि आई। सुकृत सनेह अवधि रघुराई।। बात दृढ़ाइ कुमति हँसि बोली। कुमत कुबिहग कुलह जनु खोली।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 58 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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