🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 56

The Book of Ayodhyā · Entry 56 of 664 · type: चौपाई

पुनि कह राउ सुह्रद जियँ जानी। प्रेम पुलकि मृदु मंजुल बानी।। भामिनि भयउ तोर मनभावा। घर घर नगर अनंद बधावा।। रामहि देउँ कालि जुबराजू। सजहि सुलोचनि मंगल साजू।। दलकि उठेउ सुनि ह्रदउ कठोरू। जनु छुइ गयउ पाक बरतोरू।। ऐसिउ पीर बिहसि तेहि गोई। चोर नारि जिमि प्रगटि न रोई।। लखहिं न भूप कपट चतुराई। कोटि कुटिल मनि गुरू पढ़ाई।। जद्यपि नीति निपुन नरनाहू। नारिचरित जलनिधि अवगाहू।। कपट सनेहु बढ़ाइ बहोरी। बोली बिहसि नयन मुहु मोरी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 56 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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