🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 54

The Book of Ayodhyā · Entry 54 of 664 · type: चौपाई

अनहित तोर प्रिया केइँ कीन्हा। केहि दुइ सिर केहि जमु चह लीन्हा।। कहु केहि रंकहि करौ नरेसू। कहु केहि नृपहि निकासौं देसू।। सकउँ तोर अरि अमरउ मारी। काह कीट बपुरे नर नारी।। जानसि मोर सुभाउ बरोरू। मनु तव आनन चंद चकोरू।। प्रिया प्रान सुत सरबसु मोरें। परिजन प्रजा सकल बस तोरें।। जौं कछु कहौ कपटु करि तोही। भामिनि राम सपथ सत मोही।। बिहसि मागु मनभावति बाता। भूषन सजहि मनोहर गाता।। घरी कुघरी समुझि जियँ देखू। बेगि प्रिया परिहरहि कुबेषू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 54 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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