🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 5

The Book of Ayodhyā · Entry 5 of 664 · type: चौपाई

एक समय सब सहित समाजा। राजसभाँ रघुराजु बिराजा।। सकल सुकृत मूरति नरनाहू। राम सुजसु सुनि अतिहि उछाहू।। नृप सब रहहिं कृपा अभिलाषें। लोकप करहिं प्रीति रुख राखें।। तिभुवन तीनि काल जग माहीं। भूरि भाग दसरथ सम नाहीं।। मंगलमूल रामु सुत जासू। जो कछु कहिज थोर सबु तासू।। रायँ सुभायँ मुकुरु कर लीन्हा। बदनु बिलोकि मुकुट सम कीन्हा।। श्रवन समीप भए सित केसा। मनहुँ जरठपनु अस उपदेसा।। नृप जुबराज राम कहुँ देहू। जीवन जनम लाहु किन लेहू।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 5 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷