🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 43

The Book of Ayodhyā · Entry 43 of 664 · type: चौपाई

नैहर जनमु भरब बरु जाइ। जिअत न करबि सवति सेवकाई।। अरि बस दैउ जिआवत जाही। मरनु नीक तेहि जीवन चाही।। दीन बचन कह बहुबिधि रानी। सुनि कुबरीं तियमाया ठानी।। अस कस कहहु मानि मन ऊना। सुखु सोहागु तुम्ह कहुँ दिन दूना।। जेहिं राउर अति अनभल ताका। सोइ पाइहि यहु फलु परिपाका।। जब तें कुमत सुना मैं स्वामिनि। भूख न बासर नींद न जामिनि।। पूँछेउ गुनिन्ह रेख तिन्ह खाँची। भरत भुआल होहिं यह साँची।। भामिनि करहु त कहौं उपाऊ। है तुम्हरीं सेवा बस राऊ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 43 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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