🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 41

The Book of Ayodhyā · Entry 41 of 664 · type: चौपाई

कैकयसुता सुनत कटु बानी। कहि न सकइ कछु सहमि सुखानी।। तन पसेउ कदली जिमि काँपी। कुबरीं दसन जीभ तब चाँपी।। कहि कहि कोटिक कपट कहानी। धीरजु धरहु प्रबोधिसि रानी।। फिरा करमु प्रिय लागि कुचाली। बकिहि सराहइ मानि मराली।। सुनु मंथरा बात फुरि तोरी। दहिनि आँखि नित फरकइ मोरी।। दिन प्रति देखउँ राति कुसपने। कहउँ न तोहि मोह बस अपने।। काह करौ सखि सूध सुभाऊ। दाहिन बाम न जानउँ काऊ।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 41 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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