🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 323

The Book of Ayodhyā · Entry 323 of 664 · type: चौपाई

चले समीर बेग हय हाँके। नाघत सरित सैल बन बाँके।। हृदयँ सोचु बड़ कछु न सोहाई। अस जानहिं जियँ जाउँ उड़ाई।। एक निमेष बरस सम जाई। एहि बिधि भरत नगर निअराई।। असगुन होहिं नगर पैठारा। रटहिं कुभाँति कुखेत करारा।। खर सिआर बोलहिं प्रतिकूला। सुनि सुनि होइ भरत मन सूला।। श्रीहत सर सरिता बन बागा। नगरु बिसेषि भयावनु लागा।। खग मृग हय गय जाहिं न जोए। राम बियोग कुरोग बिगोए।। नगर नारि नर निपट दुखारी। मनहुँ सबन्हि सब संपति हारी।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 323 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷