🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 321

The Book of Ayodhyā · Entry 321 of 664 · type: चौपाई

तेल नाँव भरि नृप तनु राखा। दूत बोलाइ बहुरि अस भाषा।। धावहु बेगि भरत पहिं जाहू। नृप सुधि कतहुँ कहहु जनि काहू।। एतनेइ कहेहु भरत सन जाई। गुर बोलाई पठयउ दोउ भाई।। सुनि मुनि आयसु धावन धाए। चले बेग बर बाजि लजाए।। अनरथु अवध अरंभेउ जब तें। कुसगुन होहिं भरत कहुँ तब तें।। देखहिं राति भयानक सपना। जागि करहिं कटु कोटि कलपना।। बिप्र जेवाँइ देहिं दिन दाना। सिव अभिषेक करहिं बिधि नाना।। मागहिं हृदयँ महेस मनाई। कुसल मातु पितु परिजन भाई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 321 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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