🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 317

The Book of Ayodhyā · Entry 317 of 664 · type: चौपाई

धरि धीरजु उठी बैठ भुआलू। कहु सुमंत्र कहँ राम कृपालू।। कहाँ लखनु कहँ रामु सनेही। कहँ प्रिय पुत्रबधू बैदेही।। बिलपत राउ बिकल बहु भाँती। भइ जुग सरिस सिराति न राती।। तापस अंध साप सुधि आई। कौसल्यहि सब कथा सुनाई।। भयउ बिकल बरनत इतिहासा। राम रहित धिग जीवन आसा।। सो तनु राखि करब मैं काहा। जेंहि न प्रेम पनु मोर निबाहा।। हा रघुनंदन प्रान पिरीते। तुम्ह बिनु जिअत बहुत दिन बीते।। हा जानकी लखन हा रघुबर। हा पितु हित चित चातक जलधर।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 317 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

Place in the Mānas

Navigation

🪷 जय श्री राम · जय गोस्वामी तुलसीदास 🪷