🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 313

The Book of Ayodhyā · Entry 313 of 664 · type: चौपाई

तेहि अवसर रघुबर रूख पाई। केवट पारहि नाव चलाई।। रघुकुलतिलक चले एहि भाँती। देखउँ ठाढ़ कुलिस धरि छाती।। मैं आपन किमि कहौं कलेसू। जिअत फिरेउँ लेइ राम सँदेसू।। अस कहि सचिव बचन रहि गयऊ। हानि गलानि सोच बस भयऊ।। सुत बचन सुनतहिं नरनाहू। परेउ धरनि उर दारुन दाहू।। तलफत बिषम मोह मन मापा। माजा मनहुँ मीन कहुँ ब्यापा।। करि बिलाप सब रोवहिं रानी। महा बिपति किमि जाइ बखानी।। सुनि बिलाप दुखहू दुखु लागा। धीरजहू कर धीरजु भागा।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 313 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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