🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 31

The Book of Ayodhyā · Entry 31 of 664 · type: चौपाई

प्रियबादिनि सिख दीन्हिउँ तोही। सपनेहुँ तो पर कोपु न मोही।। सुदिनु सुमंगल दायकु सोई। तोर कहा फुर जेहि दिन होई।। जेठ स्वामि सेवक लघु भाई। यह दिनकर कुल रीति सुहाई।। राम तिलकु जौं साँचेहुँ काली। देउँ मागु मन भावत आली।। कौसल्या सम सब महतारी। रामहि सहज सुभायँ पिआरी।। मो पर करहिं सनेहु बिसेषी। मैं करि प्रीति परीछा देखी।। जौं बिधि जनमु देइ करि छोहू। होहुँ राम सिय पूत पुतोहू।। प्रान तें अधिक रामु प्रिय मोरें। तिन्ह कें तिलक छोभु कस तोरें।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 31 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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