🪷 Rāmcharitamānas · Ayodhyā-Kāṇḍa · Entry 296

The Book of Ayodhyā · Entry 296 of 664 · type: चौपाई

जिमि कुलीन तिय साधु सयानी। पतिदेवता करम मन बानी।। रहै करम बस परिहरि नाहू। सचिव हृदयँ तिमि दारुन दाहु।। लोचन सजल डीठि भइ थोरी। सुनइ न श्रवन बिकल मति भोरी।। सूखहिं अधर लागि मुहँ लाटी। जिउ न जाइ उर अवधि कपाटी।। बिबरन भयउ न जाइ निहारी। मारेसि मनहुँ पिता महतारी।। हानि गलानि बिपुल मन ब्यापी। जमपुर पंथ सोच जिमि पापी।। बचनु न आव हृदयँ पछिताई। अवध काह मैं देखब जाई।। राम रहित रथ देखिहि जोई। सकुचिहि मोहि बिलोकत सोई।।
— Rāmcharitamānas Ayodhyā-Kāṇḍa entry 296 (चौपाई) · Goswāmi Tulsidās · Awadhi-Hindi Devanāgarī

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